
अक्सर मरघट के पास से गुज़रते वक्त पूरे शरीर में झुरझुरी सी होती हैं...डर बिल्कुल नहीं लगता, चाहे रात का समय ही क्यों न हो...बस ज़हन में एक सवाल हलचल मचाता है...मौत क्या होती है...मरने से पहले तो शायद ही इसका जवाब मिले... लेकिन अति जिज्ञासु मन नहीं मानता...वो तो आज ही जानना चाहता हैं...अब मैं कोई मार्टिन लूथर तो हूं नहीं कि कह दू ' आई हैव अ ड्रीम' और क्रांति हो जाए...
