सोमवार, 31 मार्च 2008

सड़क-सोच


सेंसेक्स का सांड कुलांचे भर भर कर लगता है थक गया है,,,,तभी पिछले कुछ दिनों से डाउन डाउन सा फिर रहा है.... खैर, पिछले कुछ महीनों में अगर सेंसेक्स के उछाल ने आपकी जेबें गरम कर दी हों तो... ज्यादा इतराइए मत अपने आटे दाल के पीपों पर नज़र डालिए, साथ में सब्ज़ी की डलिया को भी टटोल लीजिए सिवाय महंगाई के आपकों इनमें कुछ और मिलने से रहा।

लेकिन मैं ये बाते यहां क्यों कर रहा हूं... मैं तो शादीशुदा भी नहीं हूं, न ही मेरी कोई कथित पत्नी है जो बिन ब्याहे मेरे साथ रहती हो... कोठरी में आटे दाल के पीपे भी नहीं रखता... साला न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। बस एक सब्जी की डलिया ज़रूर है जिसे कभी कभार, जब घर में कोई आने वाला होता हैं तो एक धड़ी आलू और दो किलो प्याज़ से भर देता हूं... टमाटर तो बस ऐसे रखता हूं जैसे सौफ्टी में चेरी लगा दी हो... बस दो तीन ऊपर से...