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बड़ी बात
हर छोटे से पल की
सोमवार, 7 अप्रैल 2008
सोच की सीमाओं से
सत्य की परिभाषाओं से
छोटी और बड़ी लकीरों से
राजा और फकीरों से
एक सुलझन,
बुनने को
कब से तैयार बैठा हूं,,,,
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मेरे बारे में
चंद्रभुवन
अभी देर से समझेगा ज़माना मुझको। नया नग़मा, नई आवाज़ हूं मैं।।
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