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बड़ी बात
हर छोटे से पल की
गुरुवार, 16 अक्टूबर 2008
आईना, देखता हूं जब भी
बहुत दूर तक नज़र आता है,
हर वो चीज़ दिखती है
जिससे मेरा सरोकार है
प्यार, दुख, दिन रात
छोटा, बड़ा, ऊंचा, नीचा, पहाड़, पानी
हर चीज़ साफ दिखती है,
बस खुद का चेहरा ढूंढ रहा हूं।।
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मेरे बारे में
चंद्रभुवन
अभी देर से समझेगा ज़माना मुझको। नया नग़मा, नई आवाज़ हूं मैं।।
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